हारकर भी खुद से जीत गया
दोस्तों नमस्कार आप सभी का स्वागत है।🙏🙏🙏🙏
आज मैं आपको एक ऐसी प्रेरणा की कहानी बता रहा हूँ, जिसे पढ़ने के बाद
आपकी ऊर्जा पहले जैसी नही रहेगी तो चलिए
बिना आपका समय गवाये प्रेरणा की कहानी को शुरू करते है
दिनेश नाम का एक लड़का था उसको दौड़ने का बहुत शौक था
वह कई मैराथन में हिस्सा ले चुका था
परंतु वह किसी भी रेस को पूरा नही करता था
एक दिन उसने ठान लिया कि चाहे कुछ भी हो जाये वह रेस पूरी जरूर करेगा,
अब रेस शुरू हुई,
दिनेश ने भी दौड़ना शुरू किया धीरे-धीरे
सारे धावक आगे निकल रहे थे
मगर अब दिनेश थक गया था
वह रुक गया
फिर उसने खुद से बोला अगर मैं दौड़ नही सकता तो
कम से कम चल तो सकता हूँ,
उसने ऐसा ही किया वह धीरे-धीरे
चलने लगा मगर वह आगे जरूर बढ़ रहा था
अब वह बहुत ज्यादा थक गया था
और नीचे गिर पड़ा
उसने खुद से बोला
की वह कैसे भी करके आज दौड़ को पूरी जरूर करेगा।
वह जिद करके वापस उठा,
लड़खड़ाते हुए आगे बढ़ने लगा और अंततः वह रेस पूरी कर गया
माना कि वह रेस हार चुका था
लेकिन आज उसका विश्वास चरम पर था क्योंकि आज से पहले
रेस को कभी पूरा ही नही कर पाया था।
वह जमीन पर पड़ा हुआ था।
क्योंकि उसके पैरों की मांसपेशियों में बहुत खिंचाव हो चुका था
लेकिन आज वह बहुत खुश था,
क्योंकि
आज वह हार कर भी जीता था
दोस्तों हम भी तो इस तरह की गलती करते है हमारी जिन्दगी में
कभी भी अगर कोई परेशानी होती है तो उस काम को नही करते और छोड़ देते है
अगर आप एक छात्र हो और रोज दस घंटे की पढ़ाई करते हो
और किसी दिन कोई परेशानी की वजह से आप पढ़ाई नही करते मगर आपको
भले ही पाँच घंटे मिले पढ़ना जरूर चाहिए
दिनेश की कहानी से हमे यही सीखने को मिलता है कि अगर हम
लगातार आगे बढ़ते रहे तो एक दिन हम हारकर भी जीत
जाएंगे
छोटे छोटे कदम बढ़ाते जाओ और आगे बढ़ते जाओ
यही सफलता का नियम है।






बहुत ही सुन्दर
जवाब देंहटाएंSahi baat hai
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